गाँव की रात.आसमान में चाँद की हल्की रोशनी और हवाओं में ठंडक. तालाब के किनारे से लेकर पहाडी तक ...
शहर में दिन का उजाला था, लेकिन अजीब-सी खामोशी फैली हुई थी। अचानक, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और हाइवे के ...
धुंध और भारी खामोशी कमरे में और घनी होती चली गई. आईने पर चमकते अक्षर और तेज हो गए—क्या ...
पच्चीस साल बाद जब कबीर अपने राजसी महल से निकलकर अपने गाँव लौटा, तो हवाओं में एक अलग ही ...
शहर में दिन का उजाला था, लेकिन अजीब-सी खामोशी फैली हुई थी। अचानक, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और हाइवे के ...
सीन एक: हवेली का तहखानाकाली अंधेरी सुरंग में कबीर अकेला खडा था. हाथ में टॉर्च और दस्तावेज. टॉर्च की ...
एक. गरीबी का अंधेराकबीर का बचपन शहर की सबसे तंग गलियों में बीता. उसकी माँ बीमार थीं और पिता ...
साल दो हजार पच्चीस, दिल्ली की पुरानी गलियों में, जहाँ इतिहास की दीवारें अभी भी फुसफुसाती हैं, एक नई ...
हवेली की रात जैसे किसी अनजाने उत्सव से निकलकर गहरी खामोशी में बदल चुकी थी. सितारे आसमान पर टिमटिमा ...
Veer Zara“मैं मर भी जाऊँ तो लोग कहेंगे कि एक हिंदुस्तानी ने पाकिस्तान से इतनी मोहब्बत की कि वह ...