दारुण बिलाव के सम्मुख जैसे कि निरीह कपोत स्वयं को असहाय सा अनुभव करता है,ठीक वैसे ही उस समय ...
मारे घर की बड़ी सी खिड़की से तकरीबन एक नन्हें से बच्चे के नन्हें नन्हें दस बारह हाथ की ...
हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रेल की कुछेक पटरियां थीं और जिन पर ना जाने कौन कौन ...