वोआसमान में कनिष्क उड़ रहा था।प्राणली उसकी पकड़ में थी।नीचे जंगल था। पेड़ थे। अँधेरा था।प्राणली छटपटा रही थी।पर ...
तलवार हवा में थी।सब कुछ एक पल में हुआ।परास ने देखा और चिल्लाया :"वर्धान—!"पर वर्धान मुड़ा नहीं।वो मुड़ नहीं ...
उसे अपने सीने से लगा लिया।प्राणली ने पहले हिचकिचाया।एक पल के लिए।बस एक पल।और फिर —वो टूट गई।उसने उसकी ...
धागा टूटा।और उसी पल —कनिष्क हँसा।इतने ज़ोर से।इतनी खुशी से।जैसे सालों से कोई चीज़ चाहता था — और आज ...
शहनाई अभी भी बज रही थी।किसी को ख़बर नहीं थी कि रोकें।बाहर ढोल था। हँसी थी। फूल थे।लगता है ...
मंत्रों की आवाज़ महल में गूँज रही थी।धीमी। गहरी।हर शब्द जैसे हवा में घुल रहा हो — पर प्रणाली ...
दूल्हे राजा... बहुत जच रहे हो।”अविराज ने पलटकर देखा।कनिष्क।दरवाज़े पर टिका हुआ… बाँहें सीने पर…चेहरे पर वही मुस्कान — ...
वर्धान ने द्वार पर दस्तक दी।"आइए।"शोभित खिड़की के पास खड़े थे। सुबह की पहली रोशनी उनके सफ़ेद पंखों पर ...
तलवार अभी भी वर्धान की गर्दन पर थी।पारस की आँखें — गुस्से से भरी।वर्धान ने हिलने की कोशिश नहीं ...
पारस चुपचाप बैठा रहा।प्रणाली के रोने की आवाज़ धीरे धीरे शांत हो रही थी।कितनी देर बाद —उसने अपना सिर ...