उन्होंने मुझ पर अपने फैसले नहीं थोपे थे। उन्होंने मुझे अपनी बात रखने का मौका दिया था, मेरी राय ...
रात के ठीक दस बजे चारों अपने माता-पिता से विदा लेकर एक बार फिर प्रतापगढ़ के खंडहरों की ओर ...
ज़िंदगी न जाने कैसी हो चली थी। माँ को मैं अब अक्सर ठाकुर साहब के साथ देखता था। दोनों ...
अक्षय ने बिना एक पल गँवाए रिया को अपनी बाँहों में भर लिया। रिया का शरीर अब भी काँप ...
मामा और मामी से विदा लेकर मैं एक बार फिर माँ के साथ ठाकुर साहब की हवेली की तरफ़ ...
पूर्णिमा आने में अब सिर्फ़ दो दिन बाकी थे, लेकिन विवेक के लिए अक्षय को अनामिका से बचा पाना ...
नानी की अंतिम क्रिया होने तक माँ और मैं वहीं रहे। इन दिनों माँ बिल्कुल चुप-चुप सी हो गई ...
“अब खेल शुरू होगा, विवेक... और इस बार तुम्हें बचाने वाला कोई बाबा नहीं होगा।” अक्षय के मुँह से ...
कमरे के अंदर नानी अपनी पुरानी-सी चारपाई पर लेटी हुई थीं। उनकी हालत पहले से भी कहीं ज़्यादा खराब ...
विवेक बगल वाली सीट पर बैठा आँखें फाड़े सब कुछ देख रहा था। उसकी आँखों के सामने जो कुछ ...