खोटा सिक्का – भाग 03संध्या का समय था। गौशाला में गायों को चारा दिया जा चुका था। पश्चिम दिशा ...
समस्या नहीं, समाधान की चर्चाजड़ों को सींचने की आवश्यकतासमाज की अनेक समस्याओं पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है—नारी ...
शिक्षा नहीं, मनुष्य निर्माणविज्ञान, विद्या और चेतना का समन्वयआज मानव सभ्यता अपने इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़ी ...
चंद रुपयों से न तो पेट भर भोजन मिल सकता था और न ही रेल की टिकट खरीदी जा ...
खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो ...
अभी नहीं...गाँव के किनारे एक विशाल पीपल का वृक्ष था। उसकी फैली हुई शाखाएँ दूर-दूर तक शीतल छाया बिखेरती ...
এখন নয়...গ্রামের প্রান্তে এক বিশাল অশ্বত্থ গাছ দাঁড়িয়ে ছিল। তার বিস্তৃত শাখা-প্রশাখা দূরদূরান্ত পর্যন্ত শীতল ছায়া বিলিয়ে দিত। পাখিদের ...
মন্ত্র, বীজনাম ও মুক্তি — ভারতীয় দর্শনের প্রকৃত দিশা ভারতীয় দর্শনে "মুক্তি" বা "মোক্ষ" মানবজীবনের সর্বোচ্চ লক্ষ্য বলে বিবেচিত ...
মুক্তির পঞ্চনীতি-পথ — শ্রীশ্রী ঠাকুর অনুকূলচন্দ্রের জীবনদর্শন ভারতীয় দর্শনে "মুক্তি" বা "মোক্ষ" মানবজীবনের সর্বোচ্চ লক্ষ্য হিসেবে বিবেচিত হয়েছে। সাধারণত ...
मुक्ति का पंचनीति मार्ग — श्री श्री ठाकुर अनुकूलचन्द्र की जीवन-दृष्टि भारतीय दर्शन में "मुक्ति" या "मोक्ष" को मानव ...