कुछ दिनों बाद अग्निहोत्री हाउस फिर से चहक उठा। आज रितांशी पगफेरे के लिए अपने मायके आई थी। जैसे ...
हवेली चारों तरफ से टूटी-फूटी, बेलों और धूल से ढकी हुई है।बिजली चमकती है — और दीवारों पर पुराने ...
(पांच महीने बी(पाँच महीने बीत चुके थे। सिमरन अब उस हवेली की चारदीवारी में कैद हो गई थी। करन ...
(सुबह की नरम धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। सिमरन की आँखें खुलीं, लेकिन वह तुरंत उठी नहीं। ...
(डॉक्टर के क्लिनिक में सन्नाटा छा गया था। मशीन की स्क्रीन पर जो छवि दिख रही थी, वह किसी ...
(एक महीना बीत चुका था। हवेली का वह कोना, जहाँ कभी करन की मौजूदगी से गर्माहट होती थी, अब ...
(कुछ दिन बीत गए थे। हवेली का माहौल अब वही नहीं रहा था जो पहले था। जहाँ कभी प्यार ...
(कमरे में अचानक हवा का तेज झोंका आता है। पर्दे जोर-जोर से लहराते हैं और खिड़कियां 'खड़-खड़' करके बजने ...
(कमरे में सुबह की नरम धूप खिड़की के पर्दों से छनकर आ रही है। हवा में एक अलग ही ...
(रात के सन्नाटे में, जब करन गहरी नींद में सो रहा था, सिमरन की बेचैनी बढ़ने लगी। उसे पेट ...