भाग – 10शाम का समय था।सृष्टि की सिलाई मशीन आज कुछ ज़्यादा देर तक चलती रही।काम अब बढ़ने लगा ...
भाग – 9स्टेशन पर उतरते ही सृष्टि ने गहरी साँस ली।वही शहर,वही सड़कें,लेकिन अब उसकी चाल में झिझक नहीं ...
भाग – 8बस की खिड़की से बाहर भागती सड़कसृष्टि की आँखों के अंदर भी भाग रही थी।नया शहर।नई जगह।और ...
भाग – 7जब बदनामी ने दरवाज़ा खटखटायासमाज जब हारने लगता है,तो वह सच से नहीं,बदनामी से हमला करता है।अगली ...
भाग – 6सुबह की धूप आँगन में उतर रही थी,लेकिन घर के अंदर एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ ...
भाग – 5माँ के फैसले के बाद सब कुछ बाहर से सामान्य दिख रहा था,लेकिन अंदर ही अंदर हर ...
भाग – 4गाँव की बस सुबह-सुबह शहर पहुँची।अंकित प्लेटफॉर्म पर खड़ा था, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।उसे पता ...
भाग -3बारिश के बाद की सुबह कुछ ज़्यादा ही खामोश थी।मंदिर के सामने वही जगह, वही फूलों की खुशबू—लेकिन ...
भाग – 2उस रात अंकित देर तक सो नहीं पाया।कमरे की बत्ती बंद थी, लेकिन दिमाग़ में सवालों ...
part - 1सुबह के छह बज रहे थे।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज़िंदगी में ...