23 अक्टूबर, 1956 को चंदननगर (पश्चिम बंगाल) में जन्मी मल्लिका मुखर्जी की शिक्षा गुजरात में हुई। उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में तथा इग्नू से हिंदी साहित्य में एम.ए. किया। बचपन से ही साहित्य के प्रति उनका लगाव रहा। कार्यालय प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा (केन्द्रीय), गुजरात, अहमदाबाद से वरिष्ठ लेखापरीक्षा अधिकारी पद से अक्टूबर 2016 में सेवानिवृत्ति के बाद अब स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। गुजराती, बांग्ला एवं हिंदी में वे अपनी रचनाएँ लिखती हैं। उनके प्रकाशित काव्य-संग्रह ‘मौन मिलन के छन्द’ (2010), ‘एक बार फिर’ (2015) तथा चैट उपन्यास ‘यू एंड मी...द अल्टिमेट ड्रीम ऑफ लव’ {सह लेखक अश्विन मॅकवान (2019)} है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गुजराती काव्य-संग्रह ‘आँख आ धन्य छे’ (हिंदी अनुवाद डॉ. अंजना संधीर) का प्रकाशित बांग्ला काव्यानुवाद ‘नयन जे धन्य’ (2016) तथा स्मिता ध्रुव की गुजराती पुस्तक ‘भारतनी आज़ादीना अनामी शहीदो’ का हिन्दी अनुवाद ‘भारत की आज़ादी की लड़ाई के अमर शहीद’ (2020) है। अनेक साझा संकलनों में कहानी/कविताओं का प्रकाशन। विभिन्न पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती है। वर्ष 2008 में गुजरात राज्य, अहमदाबाद स्थित हिन्दी साहित्य परिषद द्वारा आयोजित ‘डॉ. किशोर काबरा काव्य प्रतियोगिता’ में द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर तथा वर्ष 2010 में डॉ. शांति श्रीकृष्णदास ‘कहानी प्रतियोगिता’ में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर प्रशस्ति पत्र एवं रजतपदक से सम्मानित किया गया। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा संचालित ‘हिंदीतर भाषी हिंदी लेखक पुरस्कार’ योजना के अंतर्गत काव्य-संग्रह 'एक बार फिर’ को वर्ष 2016 के लिए रुपये 1,00,000/- का नकद पुरस्कार मिला। संपर्क सूत्र : 18, शुभकामना सोसायटी, कनक-कला-1 के पीछे, आनंद नगर रोड, सेटेलाइट, अहमदाबाद-380015. मोबाइल नं : +91 9712921614

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